निवेश के नाम पर 24 करोड़ की ठगी का आरोप: फर्जी ट्रांजेक्शन दिखाकर लोगों से वसूले पैसे, कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज

गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र में निवेश के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। रियल एस्टेट, ज्वेलरी और शेयर मार्केट में निवेश का झांसा देकर करीब 24 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का आरोप लगा है। इस मामले ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है। आरोप है कि एक कंपनी बनाकर लोगों को हाई रिटर्न का लालच दिया गया। इसके बाद उनसे पैसे जमा कराए गए। बाद में फर्जी दस्तावेज और ट्रांजेक्शन दिखाकर रकम हड़प ली गई। मामले में अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पूरा मामला तब सामने आया जब विश्वजीत श्रीवास्तव ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी में कुछ लोगों ने मिलकर धोखाधड़ी की है। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गुलरिहा थाना पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि यह प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध है। पुलिस को तुरंत जांच शुरू करने और रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा गया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा खेल
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2023 में विश्वजीत की मुलाकात सोनू जायसवाल से हुई थी। बाद में सोनू कंपनी में फाउंडर के रूप में जुड़ गया। इसी दौरान उसने अपने रिश्तेदार शिवम जायसवाल को कंपनी में एजेंट के रूप में शामिल कराया। दोनों ने मिलकर निवेश के नाम पर लोगों से पैसे जुटाने शुरू किए। आरोप है कि वे लोगों को आकर्षक रिटर्न का लालच देते थे और उनसे बड़ी रकम जमा करवाते थे।
फर्जी ट्रांजेक्शन का खेल
जांच में सामने आया कि शिवम की ओर से भेजी गई डिपॉजिट स्लिप सोनू के जरिए अकाउंटेंट तक पहुंचती थी। कंपनी का लेखा-जोखा हरिकेश प्रसाद संभाल रहे थे। करीब 4.50 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट संदिग्ध पाए गए। जब इनकी जांच की गई तो अधिकांश फर्जी निकले। जिन यूटीआर नंबरों के जरिए लाखों रुपये ट्रांसफर दिखाए गए थे, उनमें वास्तविक रकम सिर्फ एक रुपये पाई गई। इससे पूरे नेटवर्क की पोल खुल गई।
एक रुपये को लाखों दिखाने की चाल
आरोपियों ने मोबाइल और लैपटॉप की मदद से बड़ा खेल खेला। वे एक रुपये के ट्रांजेक्शन को एडिट करके लाखों रुपये का दिखाते थे। इसके बाद फर्जी रसीदें तैयार की जाती थीं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अपने रिश्तेदारों के खातों में कमीशन के नाम पर लाखों रुपये ट्रांसफर कराए जाते थे। यह पूरा खेल करीब तीन महीने तक चलता रहा। किसी को शक नहीं हुआ। लेकिन ऑडिट के दौरान सच्चाई सामने आ गई।
ऑडिट में खुला 24 करोड़ का फर्जीवाड़ा
30 अप्रैल को कंपनी का ऑडिट हुआ। इसी दौरान पूरे घोटाले का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि फर्जी स्क्रीनशॉट के जरिए करीब 24 करोड़ रुपये का लेन-देन दिखाया गया था। यह पूरी तरह से जालसाजी थी। इसके अलावा नवीन श्रीवास्तव और प्रियंका श्रीवास्तव पर भी आरोप है कि उन्होंने निवेशकों से 82 लाख रुपये अपने खातों में मंगवाकर निजी इस्तेमाल में खर्च कर दिए।
चेक किए जा रहे डिजिटल एविडेंस
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने पहले स्थानीय पुलिस को जानकारी दी थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्हें कोर्ट का सहारा लेना पड़ा। अब अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में शामिल सभी आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। डिजिटल सबूतों को भी खंगाला जा रहा है।
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